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Tuesday, October 13, 2015

ख़ामोश गलियारें


ख़ामोश गलियारें

ख़ामोश गलियारों में 
अपने अंदर कई चींखे लिए हुए 
ख़ामोशी से 
अंधेरे देखते रहते है ....
कोई तमाशा नहीं है
कोई शोर नहीं है
सब ठीक है
बस यह साँसे चलती रहे 
अपने लिए ही सही
नहीं तो किसी की 
गुलामी के लिए ...
ख़ामोश गलियारों में 
चुपके से
बस
कई चीखे दफ़न हो जाती है ....
-
हरेश परमार