ख़ामोश गलियारें
ख़ामोश गलियारों में
अपने अंदर कई चींखे लिए हुए
ख़ामोशी से
अंधेरे देखते रहते है ....
कोई तमाशा नहीं है
कोई शोर नहीं है
सब ठीक है
बस यह साँसे चलती रहे
अपने लिए ही सही
नहीं तो किसी की
गुलामी के लिए ...
ख़ामोश गलियारों में
चुपके से
बस
कई चीखे दफ़न हो जाती है ....
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