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Thursday, March 9, 2017

गुल्लक

हमारे छोटे दोस्त ने एक दिन बड़ी नोट फाड़ के कहा था की ऐसी नहीं कुछ अच्छी नोट दो... तब हँसते हुए उनके पापा ने उसे गुल्लक में डालने के लिए 10 की नोट दी थी. जब उनकी मम्मी चिल्लाई थी तब उसने कहा था... बच्चा ही तो है... बचपन की यादे कभी तजा हो जायेगी की उसने बचपने में 500 की नोट फाड़ दी थी... आज वह गुल्लक भी उनके बचपन में ही टूटा...

Wednesday, September 14, 2016

क्रांति का नारा : जय भीम का नारा

'वंचित जनता' में प्रकाशित आलेख आपके सामने प्रस्तुत है 
धन्यवाद