मुरझाते फूल
आपके स्वर्ग हमें नहीं चाहिए
हमें डरना भी नहीं है आपके उस नर्क से
हम छोटे छोटे सपनों लिए आसमान के नीचे
तरोभरी रात में सोनेवाले है...
हा... डर होता है, फुटपाथों पर, बाग़ो-खलिहानों में
मगर जब चांदनी होती है तो मौत का डर कही ओर होता है |
सूरज की रौशनी में जैसे सहज ही फूल खिलते है ...
भूख से तडपे हमारे पेट में
कुछ रोटी मिल जाये, हम फूलों की तरह खिल उठते है |
हमारी ख़ुशी आपकी ख़ुशी से बहुत छोटी है
अहसास है हमें
यह अहसास तब भी होता है
जब हमारे हाथ में आपकी ही तरह रोटी होती है
पर ख़ुशी आपके चेहरे पर नहीं होती
तब हम साम के ढलते सूरज में मुरझाते फूल की तरह कुम्हलाते रहते है
आप चांदनी से नहाई धरती, तारोभरी रात नहीं देख पाते
हमारे अहसास को क्या आप देखोगें ?
हम छोटी खुशियों में खिलते है
हम उन्ही अहसासों से मुरझा जाते है |
- हरेश परमार
हमें डरना भी नहीं है आपके उस नर्क से
हम छोटे छोटे सपनों लिए आसमान के नीचे
तरोभरी रात में सोनेवाले है...
हा... डर होता है, फुटपाथों पर, बाग़ो-खलिहानों में
मगर जब चांदनी होती है तो मौत का डर कही ओर होता है |
सूरज की रौशनी में जैसे सहज ही फूल खिलते है ...
भूख से तडपे हमारे पेट में
कुछ रोटी मिल जाये, हम फूलों की तरह खिल उठते है |
हमारी ख़ुशी आपकी ख़ुशी से बहुत छोटी है
अहसास है हमें
यह अहसास तब भी होता है
जब हमारे हाथ में आपकी ही तरह रोटी होती है
पर ख़ुशी आपके चेहरे पर नहीं होती
तब हम साम के ढलते सूरज में मुरझाते फूल की तरह कुम्हलाते रहते है
आप चांदनी से नहाई धरती, तारोभरी रात नहीं देख पाते
हमारे अहसास को क्या आप देखोगें ?
हम छोटी खुशियों में खिलते है
हम उन्ही अहसासों से मुरझा जाते है |
- हरेश परमार